सुलतानपुर। जनवादी लेखक संघ की ओर से पर्यावरण पार्क में आयोजित प्रेमचंद जयंती समारोह में साहित्यकार प्रेमचंद के जीवन और व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि प्रेमचंद का जीवन सादगीपूर्ण जरूर था, लेकिन उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर या लाचार बताना तथ्यों के अनुरूप नहीं है।
‘प्रेमचंद पर जबरन गरीबी मढ़ दी गई’
डॉ. ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि मजदूरों और किसानों के पक्षधर लेखक के रूप में प्रेमचंद की छवि प्रस्तुत करने के प्रयास में उनके निजी जीवन पर भी जबरन गरीबी का आवरण चढ़ा दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज के शोषित, पीड़ित और आम आदमी की आवाज बनाया। उनकी रचनाओं में आम जनजीवन की संवेदनाएं और सामाजिक यथार्थ प्रमुखता से दिखाई देता है।
प्रेमचंद का साहित्य आज भी प्रासंगिक
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राम प्यारे प्रजापति ने कहा कि प्रेमचंद संवेदनशील, राष्ट्रभक्त और जुझारू लेखक थे। उनके लेखन में प्रगतिशील सोच स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं अपने समय का सटीक दस्तावेज होने के साथ-साथ आज भी समाज को दिशा देने और प्रेरित करने का कार्य कर रही हैं।
ऊधम सिंह और मोहम्मद रफी को भी किया गया याद
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजकपूर शुक्ल ने कहा कि प्रेमचंद जयंती के दिन ही शहीद ऊधम सिंह का बलिदान दिवस और महान गायक मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि भी होती है। ऐसे में इन दोनों महान विभूतियों का स्मरण करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
इन लोगों ने भी रखे विचार
कार्यक्रम का संचालन बृजेन्द्र नाथ तिवारी ने किया। इस अवसर पर प्रियव्रत पांडेय ‘अक्षत’, अजय पांडेय, विपिन कुमार, राजेश कुमार त्रिपाठी सहित अन्य वक्ताओं ने भी प्रेमचंद के साहित्य, व्यक्तित्व और सामाजिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।