प्रतापगढ़। पट्टी कोतवाली में युवक अर्जुन की संदिग्ध मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। 23 सितंबर को पट्टी तहसील के अधिवक्ताओं ने मृतक के परिवार की ओर से ब्राह्मण परिवार के खिलाफ दर्ज कराए गए हत्या के मुकदमे का विरोध किया। बार एसोसिएशन के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने तहसील और रजिस्ट्री कार्यालय में तालाबंदी कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के आने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी।
मुख्य बातें
- पट्टी तहसील और रजिस्ट्री कार्यालय में अधिवक्ताओं ने की तालाबंदी
- अर्जुन मौत मामले में दर्ज मुकदमे को लेकर पुलिस पर उठाए सवाल
- डीएम-एसपी के आने तक हड़ताल जारी रखने की दी चेतावनी
बार एसोसिएशन की बैठक के बाद शुरू हुआ विरोध
बार एसोसिएशन पट्टी के अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी की अगुवाई में अधिवक्ताओं ने सुबह करीब 10:30 बजे बार भवन में बैठक की। बैठक में कोतवाली परिसर में हुई युवक की मौत को गंभीर और दुखद बताते हुए मामले के विरोध में आंदोलन का फैसला लिया गया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने तहसील और रजिस्ट्री कार्यालय बंद करा दिया। तहसील गेट से रजिस्ट्री कार्यालय तक अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
अधिवक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
बार अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी ने आरोप लगाया कि कोतवाली परिसर में हुई अर्जुन की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या का मामला है और पुलिस अपनी कथित नाकामी छिपाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से सवर्ण और दलित समाज के बीच तनाव की स्थिति बन रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब घटना पुलिस की मौजूदगी में कोतवाली परिसर में हुई, तो मृतक के परिवार की ओर से ब्राह्मण परिवार के खिलाफ मुकदमा क्यों दर्ज किया गया। उनका कहना था कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जानी चाहिए।
मजिस्ट्रियल जांच पर भी जताया अविश्वास
अधिवक्ताओं ने मामले की जांच रिटायर्ड हाईकोर्ट जज से कराने की मांग की। बार अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें मजिस्ट्रियल जांच पर भरोसा नहीं है। उन्होंने पीड़ित ब्राह्मण परिवार को हर संभव कानूनी और अन्य मदद दिलाने की बात कही। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचकर उनकी बात नहीं सुनते, तब तक आंदोलन और हड़ताल जारी रहेगी।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता प्रदर्शन में शामिल
विरोध प्रदर्शन में दिलीप मिश्रा, रवी सिंह, नंदन चतुर्वेदी, अंबरीश तिवारी, अंजनी शुक्ल, शुभम सांडिल्य, रजनीश पाण्डेय, अनुराग त्रिपाठी, प्रदीप पाठक, संसार सिंह और अनुज मिश्र समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे। अर्जुन की मौत और उसके बाद दर्ज मुकदमे को लेकर अब पट्टी में विरोध का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। मामले में पुलिस की जांच, मजिस्ट्रियल जांच और सामने आए आरोपों के बीच आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।