सुल्तानपुर। लंभुआ कोतवाली क्षेत्र के सखौली गांव में 13 अगस्त को बिजली के पोल पर काम करते समय लाइनमैन वीरेंद्र शुक्ला की करंट की चपेट में आने से मौत के मामले में अब बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) रितेश्वर बंधु के दावे ने जांच को नया मोड़ दे दिया है। XEN ने NewsBook24 से फोन पर बातचीत में कहा कि विभागीय जांच में सामने आया है कि वीरेंद्र शुक्ला को सखौली गांव के ही एक व्यक्ति ने अपने निजी काम के लिए बुलाया था। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति के पास वैध विभागीय बिजली कनेक्शन भी नहीं था।
निजी काम के लिए बुलाने का दावा
XEN के मुताबिक, सखौली में वीरेंद्र शुक्ला को काम के लिए बुलाने वाले व्यक्ति की बिजली आपूर्ति में समस्या थी। चूंकि उसके पास विभागीय कनेक्शन नहीं था, इसलिए उसने वीरेंद्र शुक्ला को निजी तौर पर काम करने के लिए बुलाया। XEN का कहना है कि यदि वैध कनेक्शन होता तो बिजली से जुड़ी समस्या के लिए विभाग से संपर्क किया जाता।
उन्होंने यह भी दावा किया कि विभागीय जांच में हादसे के पीछे विभाग की प्रथम दृष्टया कोई भूमिका सामने नहीं आई है। उनका कहना है कि पुलिस को सबसे पहले उस व्यक्ति की भूमिका की जांच करनी चाहिए थी, जिसने वीरेंद्र को मौके पर बुलाया था।
निर्धारित समय से पहले हुई बिजली सप्लाई बहाल
XEN के अनुसार, जिस फीडर पर हादसा हुआ, वहां रोस्टिंग के तहत बिजली आपूर्ति बंद थी। WhatsApp ग्रुप में जानकारी साझा की गई थी कि शाम करीब 8:20 बजे बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी। आरोप है कि इसी दौरान वीरेंद्र शुक्ला पोल पर काम करने के लिए चढ़े थे।
विभागीय अधिकारी का दावा है कि बिजली की सप्लाई निर्धारित समय से करीब एक घंटे पहले, लगभग 7:20 बजे ही पावर हाउस तक पहुंच गई थी। वीरेंद्र शुक्ला के नाम से कोई आधिकारिक शटडाउन नहीं लिया गया था और पावर हाउस को भी उनके पोल पर काम करने की जानकारी नहीं थी। ऐसे में नियमित प्रक्रिया के तहत बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई, जिसके बाद वीरेंद्र करंट की चपेट में आ गए।
FIR में संविदाकर्मियों के नाम पर भी सवाल
XEN ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि संविदा कर्मी विनोद पांडेय और अखिलेश चंद्र को बिना पर्याप्त जांच के गिरफ्तार किया गया। उन्होंने दावा किया कि विभाग से मुआवजा मिलने की उम्मीद के चलते विभाग से जुड़े लोगों के नाम FIR में सीधे शामिल कराए गए।
वहीं, इस मामले में संविदा लाइनमैन विनोद पांडेय के जेल जाने के बाद उनकी 20 वर्षीय बेटी शिखा पांडेय की भी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि पिता के जेल जाने का सदमा शिखा सहन नहीं कर सकीं। हालांकि पुलिस के अनुसार शिखा करीब तीन महीने से बीमार थीं और उनका इलाज चल रहा था।
वीरेंद्र के परिवार पर टूटा आर्थिक संकट
हादसे में जान गंवाने वाले वीरेंद्र शुक्ला अपने परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अब इस पूरे मामले में बिजली विभाग और पुलिस के दावों के बीच कई सवाल सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि वीरेंद्र शुक्ला को पोल पर काम करने के लिए किसने बुलाया था, उनके लिए शटडाउन क्यों नहीं लिया गया और बिजली आपूर्ति निर्धारित समय से पहले कैसे बहाल हुई। साथ ही हादसे की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी बनती है, यह भी जांच के बाद ही साफ होगा।