लखनऊ में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय पारंपरिक कथक समारोह ‘नमन: परंपरा कथक की’ (Naman: Parampara Kathak Ki) का मंगलवार को संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह में समापन हुआ। कथकाचार्य पं. लच्छू महाराज को समर्पित इस समारोह में कलाकारों ने पारंपरिक कथक बंदिशों (Traditional Kathak Compositions), लयकारी (Rhythmic Presentation) और भाव-अभिनय (Expression) के जरिए दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में खास तौर पर कथक की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
मुख्य बातें
- डॉ. रुचि खरे और उनकी शिष्याओं ने कथक की पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं।
- अष्टपदी ‘निरतत ढंग’ में 15 मात्रा की मत्त ताल पर लयकारी पेश की गई।
- पं. लच्छू महाराज की 125वीं जयंती पर कालका बिंदादीन ड्योढ़ी में ‘नृत्यांजलि’ हुई।
डॉ. रुचि खरे और शिष्याओं ने दी मुख्य प्रस्तुति
समारोह की मुख्य प्रस्तुति लखनऊ की कथक गुरु डॉ. रुचि खरे और उनकी शिष्याओं ने दी। उन्होंने राग मालकौंस में ध्रुपद ‘शंकर अति प्रचंड, नाचत कर डमरू बाजे’ से नृत्य की शुरुआत की। इसके बाद ठाट, आमद, परन, यति, रुखसार और दुर्गा परन जैसी कथक की पारंपरिक शैलियों और संरचनाओं की प्रस्तुति हुई। कलाकारों ने लय, ताल और भाव के बेहतर तालमेल से कथक की शास्त्रीय गरिमा को मंच पर जीवंत किया।
15 मात्रा की मत्त ताल पर दिखी लयकारी
अष्टपदी ‘निरतत ढंग’ में वैभवी मिश्रा, वैभव लक्ष्मी, मिल्की गुप्ता, रुनझुन सिंह, अत्रांशी सिंह, श्वेता गुप्ता, शैलेंद्र कुशवाहा, तनिष्का सक्सेना और गार्गी राजगंगा ने 15 मात्रा की मत्त ताल पर लयकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अंतिम चरण में बेगम अख्तर के दादरा ‘कोयलिया मत कर पुकार’ पर भावपूर्ण कथक प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
इससे पहले बाल कलाकारों ने ‘गुरु कृपा’, ‘कथक के रंग कृष्ण के संग’ और ‘झूला’ जैसी प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कला संवर्धन नीति और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। अकादमी अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक राज कुमार के संयोजन में समारोह आयोजित हुआ।
लच्छू महाराज की 125वीं जयंती पर ‘नृत्यांजलि’
वहीं, गोलागंज स्थित कालका बिंदादीन ड्योढ़ी एवं कथक संग्रहालय में कथक के पुरोधा पं. लच्छू महाराज की 125वीं जयंती के अवसर पर ‘नृत्यांजलि’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कथक संग्रहालय और नंदश्री संगीत संस्थान की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने कथक और भक्ति नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
मुख्य अतिथि कथक गुरु डॉ. मीरा दीक्षित और विशिष्ट अतिथि राम मोहन महाराज ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डॉ. मीरा दीक्षित ने पं. लच्छू महाराज के शास्त्रीय नृत्य में योगदान को याद करते हुए उनकी विरासत को महत्वपूर्ण बताया। राम मोहन महाराज ने भी कथक की समृद्ध परंपरा और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया।
भक्ति नृत्य और भाव अभिनय ने बांधा समां
कार्यक्रम में ऋषिका शुक्ला, अदिति, वामाक्षी और अनन्या ने ‘श्री कृष्ण गिरिधर’ पर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। लावण्या और ध्वनि ने ‘अरज सुनो बनवारी’ पर भाव अभिनय किया। वहीं एंजेल समूह ने ‘मोहे पनघट पर नंदलाल’ पर समूह नृत्य पेश किया। कार्यक्रम का समापन योग्या वर्मा और शांभवी अग्रवाल की शुद्ध कथक प्रस्तुति से हुआ।
इन दोनों आयोजनों के जरिए कलाकारों ने न सिर्फ पं. लच्छू महाराज की कला विरासत को याद किया, बल्कि कथक की पारंपरिक शैली को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता भी दिखाई।