लखनऊ, 1 सितंबर। उत्तर प्रदेश में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को लेकर योगी सरकार की योजनाओं का असर आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिखाई दे रहा है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 (Saksham Anganwadi & POSHAN 2.0) की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील (Hot Cooked Meal) योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों को नियमित तौर पर ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन-को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे इस योजना से नियमित रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।
मुख्य बातें
- यूपी में 32.88 लाख बच्चों को नियमित मिल रहा गर्म और पौष्टिक भोजन
- 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए निर्धारित है हॉट कुक्ड मील योजना
- भोजन की गुणवत्ता जांच के लिए परोसने से पहले दो वयस्कों की जांच अनिवार्य
साप्ताहिक मेन्यू में रोटी-सब्जी से लेकर दाल-चावल तक
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से बच्चों के लिए साप्ताहिक मेन्यू निर्धारित किया गया है। इसके तहत अलग-अलग दिनों में रोटी-सब्जी, चावल-दाल, मौसमी सब्जियों से तैयार तहरी समेत अन्य पौष्टिक भोजन बच्चों को दिया जाता है। सरकार का उद्देश्य केवल बच्चों को नियमित भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कम उम्र से ही संतुलित और पौष्टिक आहार की आदत विकसित करना भी है। आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए गर्म भोजन उपलब्ध कराने से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने पर जोर दिया जा रहा है।
भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष जोर
बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए विभाग ने कई मानक निर्धारित किए हैं। कोटेदार के माध्यम से मिलने वाला खाद्यान्न अच्छी गुणवत्ता का होना जरूरी है। भोजन तैयार करने से पहले अनाज की अच्छी तरह सफाई और हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोने की व्यवस्था की गई है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों तक पहुंचने वाले भोजन को स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक बनाए रखना है। भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
परोसने से पहले दो वयस्क करेंगे भोजन की जांच
बच्चों को भोजन परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच भी की जाती है। विभागीय व्यवस्था के तहत कम से कम दो वयस्क व्यक्तियों द्वारा रोस्टर के आधार पर भोजन की जांच की जाती है। इनमें शिक्षक, रसोइया या माता समिति के सदस्य शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान भोजन के स्वाद और गुणवत्ता को परखा जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों तक पहुंचने वाला भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भी हो।
हर बच्चे को प्रतिदिन 70 ग्राम खाद्यान्न से तैयार भोजन
अपर मुख्य सचिव (महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग) लीना जौहरी ने बताया कि हॉट कुक्ड मील योजना के तहत प्रदेश में नियमित रूप से 32.88 लाख बच्चों को गर्म और पौष्टिक भोजन मिल रहा है। प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 70 ग्राम खाद्यान्न से तैयार भोजन दिया जाता है।
को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण योजना (PM POSHAN) की रसोई और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है। वहीं नॉन-को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्थानीय निकायों या ग्राम पंचायतों की ओर से उपलब्ध कराए गए बर्तन, गैस चूल्हे और अन्य संसाधनों की मदद से भोजन तैयार कराया जाता है। इस व्यवस्था के जरिए सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले छोटे बच्चों को नियमित पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।