आशुतोष दुबे
सुल्तानपुर। सावन के दौरान श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाले बिजेथुआ महावीरन धाम में नागपंचमी के बाद एक बार फिर भक्तों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। इस बार 17 अगस्त को नागपंचमी और उसके अगले दिन 18 अगस्त को मंगलवार पड़ रहा है। बड़े मंगल के इस संयोग को देखते हुए कादीपुर और सुल्तानपुर के साथ जौनपुर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर और प्रतापगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
मुख्य बातें
- 18 अगस्त को बड़े मंगल के चलते बिजेथुआ धाम में बढ़ेगी श्रद्धालुओं की आवाजाही
- कालनेमि वध से जुड़ी स्थानीय मान्यता के कारण खास धार्मिक महत्व
- मकरी कुंड और दक्षिणाभिमुख हनुमान प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
- रामायण सर्किट (Ramayana Circuit) से जुड़ने के बाद धार्मिक पर्यटन को भी मिली पहचान
मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़
सूरापुर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिजेथुआ महावीरन धाम भगवान हनुमान को समर्पित प्राचीन धार्मिक स्थल है। जिला प्रशासन की वेबसाइट के मुताबिक मंगलवार और शनिवार को यहां सामान्य दिनों की अपेक्षा बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन में यह भीड़ और बढ़ जाती है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल नजर आता है।
बड़े मंगल के मौके पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। भक्त बजरंगबली के दर्शन कर सिंदूर, चोला, फूल-माला और प्रसाद अर्पित करेंगे।
कालनेमि की कथा से जुड़ी है मान्यता
बिजेथुआ महावीरन धाम से जुड़ी सबसे प्रमुख धार्मिक मान्यता हनुमान जी और कालनेमि के प्रसंग को लेकर है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे, उसी दौरान रावण की ओर से भेजे गए कालनेमि ने उन्हें रोकने का प्रयास किया था। मान्यता है कि इसी क्षेत्र में हनुमान जी ने कालनेमि का वध किया था।
हालांकि धार्मिक ग्रंथों में इस स्थान का नाम स्पष्ट तौर पर बिजेथुआ नहीं मिलता। कालनेमि वध से इस स्थल का संबंध स्थानीय परंपराओं और जनश्रुतियों में बताया जाता है।
मकरी कुंड में भी श्रद्धालुओं की आस्था
बिजेथुआ मंदिर के निकट स्थित मकरी कुंड भी इस धार्मिक स्थल का अहम हिस्सा है। मान्यता है कि संजीवनी बूटी की तलाश में जाते समय हनुमान जी ने यहां स्नान किया था। इसी वजह से मंदिर आने वाले कई श्रद्धालु पहले मकरी कुंड के दर्शन करते हैं और इसके बाद हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।
धाम से जुड़ी धार्मिक कथाएं और मान्यताएं श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख कारण हैं। यहां आने वाले भक्त मंदिर दर्शन के साथ मकरी कुंड से जुड़े धार्मिक प्रसंगों को भी आस्था के नजरिए से देखते हैं।
दक्षिणाभिमुख प्रतिमा और घंटियां भी खास पहचान
बिजेथुआ महावीरन मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा को लेकर स्थानीय स्तर पर विशेष मान्यता है। श्रद्धालुओं के अनुसार यहां हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिणाभिमुख है। इसी विशेषता के चलते भी इस धाम की अलग धार्मिक पहचान बनी हुई है।
मंदिर में भक्त पूजा-अर्चना के दौरान घंटियां भी चढ़ाते हैं। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी बड़ी संख्या में घंटियां चढ़ाए जाने की परंपरा का उल्लेख किया गया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बजरंगबली के दरबार में मनोकामना लेकर आने वाले भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धार्मिक पर्यटन से भी बढ़ रही पहचान
बिजेथुआ महावीरन अब केवल स्थानीय आस्था का केंद्र नहीं रह गया है। इसे रामायण सर्किट (Ramayana Circuit) से जोड़कर धार्मिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की दिशा में भी काम हुआ है। धाम में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और पर्यटन विकास से संबंधित योजनाएं प्रस्तावित या प्रगति पर हैं।
बड़े मंगल पर मंदिर परिसर में जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों के बीच भक्तिमय माहौल रहने की उम्मीद है। सावन में हर वर्ष बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या और इस बार नागपंचमी के अगले दिन मंगलवार पड़ने के कारण धाम पर विशेष भीड़ जुटने की संभावना है।