प्रयागराज
प्रयागराज में स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल का नाम बदलकर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखने की मांग को लेकर 5 अगस्त से महुआ डाबर संग्रहालय परिवार ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। मांग है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और काकोरी कांड के अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को आज भी वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।
हाइलाइट्स:
- स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल का नाम बदलने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू।
- काकोरी कांड की 100वीं वर्षगांठ पर ठाकुर रोशन सिंह को सम्मान देने की उठी मांग।
- मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान।
महुआ डाबर संग्रहालय के संस्थापक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि देश आजादी का अमृत काल और काकोरी ट्रेन एक्शन की 100वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऐसे समय में ऐतिहासिक भूल को सुधारते हुए स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह अस्पताल’ किया जाना चाहिए।
स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल का नाम बदलने की क्यों उठी मांग?
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि जिस ऐतिहासिक मलाका जेल में 19 दिसंबर 1927 को ठाकुर रोशन सिंह को फांसी दी गई थी, उसी स्थान पर वर्तमान में स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल स्थित है। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक स्थल को शहीद के नाम से जोड़ना उनके सर्वोच्च बलिदान का वास्तविक सम्मान होगा।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि ठाकुर रोशन सिंह के फांसी से पहले लिखे गए पत्र, दुर्लभ चित्र और मुकदमे से जुड़े अभिलेख आज भी महुआ डाबर संग्रहालय में सुरक्षित हैं, जो उनके संघर्ष और राष्ट्रभक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
मांग पूरी होने तक जारी रहेगा धरना
महुआ डाबर संग्रहालय परिवार का कहना है कि वह वर्षों से स्वरूप रानी नेहरू हॉस्पिटल का नाम बदलने की मांग उठा रहा है। उनका कहना है कि काकोरी ट्रेन एक्शन के 100 वर्ष पूरे होने के बाद भी ठाकुर रोशन सिंह को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसलिए जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।