मायावती का अखिलेश यादव पर हमला, बोलीं- ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान पर पूरे जाट समाज से माफी मांगें अखिलेश

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव के राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और उसके नेता केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर दिए गए ‘हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान को अमर्यादित और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को न केवल RLD और उसके नेता से, बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए पूरे जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए।

मुख्य बातें
  • मायावती ने अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ बयान को बताया अमर्यादित
  • बोलीं- अखिलेश को जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए
  • सपा के पुराने गठबंधन और राजनीतिक रवैये पर साधा निशाना
  • 2027 विधानसभा चुनाव में सपा को सत्ता में न आने देने की अपील

‘अखिलेश को पूरे जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए’

मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख का अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता केंद्रीय मंत्री के बारे में इस तरह का सार्वजनिक बयान देना पूरी तरह अमर्यादित और अशोभनीय है। उन्होंने इसे अहंकारी और अलोकतांत्रिक बयानबाजी करार दिया। मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को RLD और उसके नेता से माफी मांगने के साथ-साथ स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार के अपमान के लिए पूरे जाट समाज से भी अविलंब माफी मांगनी चाहिए।

‘सपा का राजनीतिक रवैया हमेशा संकीर्ण और अविश्वसनीय रहा’

BSP प्रमुख ने सपा के राजनीतिक इतिहास और गठबंधन की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का चाल, चरित्र और चेहरा उसके विरोधियों के साथ-साथ सहयोगी दलों के लिए भी राजनीतिक संकीर्णता और जातिवादी द्वेष से प्रभावित रहा है। मायावती के मुताबिक, सपा के इस रवैये का चुनावी लाभ कई मौकों पर BJP को मिला और सेक्युलर ताकतें कमजोर हुईं।

उन्होंने 1993 में सपा-बसपा गठबंधन और उसके बाद हुए लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया। मायावती ने कहा कि गठबंधन टूटने के बाद 2 जून 1995 को उनके खिलाफ हत्या के षड्यंत्र के तहत कुख्यात स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ था।

2019 के गठबंधन का भी मायावती ने किया जिक्र

मायावती ने आगे कहा कि बाद में अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव की पुरानी गलतियां न दोहराने का आश्वासन देकर लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन किया था। हालांकि, चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आने के बाद यह गठबंधन भी ज्यादा समय तक नहीं चला।

उन्होंने आरोप लगाया कि BSP के प्रति सपा के अहंकारी और स्वार्थी रवैये के कारण गठबंधन टूट गया। मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के कारवां वाली पार्टी है और वह अपने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांतों से कभी विमुख नहीं हो सकती।

‘सपा गठबंधन में काम निकालकर गिरगिट की तरह रंग बदलती है’

मायावती ने सपा पर गठबंधन की राजनीति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सपा गठबंधन के जरिए अपना काम निकालना जानती है और काम निकलने के बाद ‘गिरगिट की तरह रंग बदल लेती है।’ उन्होंने कहा कि इसके बाद सपा दूसरी पार्टियों के बारे में अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल करती है। मायावती ने सर्वसमाज के लोगों से सपा की कथित संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सावधान रहने की अपील की।

PDA को लेकर भी अखिलेश पर निशाना

मायावती ने अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश अपने राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार PDA में ‘P’ का अर्थ कभी पिछड़ा वर्ग तो कभी पंडितों के हित से जोड़ते हैं। मायावती ने दावा किया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और अपर कास्ट समाज, खासकर ब्राह्मण समाज की हितैषी नहीं रही है।

उन्होंने सपा की पिछली सरकारों पर दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज के शोषण व उत्पीड़न का आरोप लगाया। मायावती ने कहा कि सपा सरकारों में विकास और जनहित के बजाय गुंडों, बदमाशों, माफियाओं और अराजक तत्वों को लाभ मिला।

मायावती ने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी थी कि महिलाओं को शाम के बाद घर से निकलने में डर लगता था। उन्होंने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता से सपा को सत्ता में नहीं लाने की अपील की।

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