सुल्तानपुर। जिले में बिजली फॉल्ट ठीक करने के दौरान करंट लगने से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले आठ दिनों में अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हुए इन हादसों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाइलाइट्स
- सुल्तानपुर में आठ दिनों के भीतर करंट लगने से दो लोगों की मौत
- अखंडनगर में 6 अगस्त को संविदाकर्मी जितेंद्र कुमार की गई थी जान
- 13 अगस्त की रात लंभुआ में वीरेन्द्र कुमार शुक्ल की करंट लगने से मौत
- शटडाउन और बिजली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विभाग पर उठे गंभीर सवाल
8 दिन में दो लोगों की मौत
पहली घटना 6 अगस्त को अखंडनगर उपकेंद्र पर हुई थी। यहां बिजली फॉल्ट ठीक करने के दौरान संविदाकर्मी जितेंद्र कुमार करंट की चपेट में आ गए थे। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि शटडाउन लेने के बावजूद बिजली आपूर्ति चालू कर दी गई, जिससे यह हादसा हुआ।
इसके बाद 13 अगस्त की रात लंभुआ में एक और हादसा सामने आया। यहां संविदाकर्मी के सहयोगी वीरेन्द्र कुमार शुक्ल (36) की करंट लगने से मौत हो गई। वीरेन्द्र जफरापुर, लंभुआ के रहने वाले थे और बिजली विभाग में संविदाकर्मी के सहयोगी के तौर पर काम करते थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार दो घटनाओं के बाद बिजली विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फॉल्ट ठीक करने के दौरान बिजली आपूर्ति बंद रखने और शटडाउन की प्रक्रिया का सुरक्षित तरीके से पालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
दोनों घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या बिजली लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से निर्धारित नियमों का कितना पालन कराया जा रहा है?
हादसों के बाद जांच की जरूरत
आठ दिनों के भीतर हुई दो मौतों ने विभागीय अधिकारियों के सामने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बढ़ा दी है। हादसों की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन घटनाओं में लापरवाही कहां हुई।
लगातार हो रही मौतों के बीच बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती फॉल्ट ठीक करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि काम के दौरान किसी और की जान जोखिम में न पड़े।