आशुतोष दुबे
जौनपुर। देश आजादी के 78 वर्ष पूरे कर चुका है और विकसित भारत के साथ विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं। वहीं, जौनपुर के सुइथाकला विकासखंड में बिजली व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो दिनों से पूरी-पूरी रात बिजली गायब रहती है, जबकि दिन में भी महज दो से चार घंटे ही आपूर्ति हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जो बिजली आती भी है, वह बार-बार ट्रिप होती है और वोल्टेज इतना कम रहता है कि बल्ब तक ठीक से नहीं जल पाते। पंखे धीमी गति से चलते हैं और अन्य विद्युत उपकरणों का संचालन लगभग असंभव हो जाता है।
स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हर वर्ष फाल्ट, तार टूटने और मरम्मत का हवाला दिया जाता है, लेकिन सर्दियों में जर्जर लाइनें, ट्रांसफार्मर और उपकरणों को बदलने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। उनका कहना है कि गर्मी आते ही पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार उमस भरी रातों में बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं। सरकार जहां 18 से 20 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करती है, वहीं सुइथाकला के लोग कुछ घंटों की बिजली के लिए भी तरस रहे हैं।
लोगों ने जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बिजली जैसी बुनियादी समस्या पर कोई प्रभावी पहल दिखाई नहीं देती।
ग्रामीणों ने 9 जुलाई 2025 को ब्लॉक मुख्यालय पर आयोजित ‘पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जिसमें ऊर्जा मंत्री ने सुइथाकला में 132 केवी विद्युत उपकेंद्र की स्थापना की घोषणा की थी। उनका कहना है कि लगभग एक वर्ष बीतने के बाद भी न तो उपकेंद्र का निर्माण शुरू हुआ और न ही बिजली व्यवस्था में कोई सुधार दिखाई दिया।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
वहीं, अधिशाषी अभियंता विद्युत ए.के. धर्मा ने बताया कि रात के समय 40 किलोमीटर लंबी 33 केवी लाइन में फाल्ट होने पर उसे तलाशने में काफी समय लगता है, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि 132 केवी विद्युत उपकेंद्र की घोषणा हुई थी, लेकिन भूमि उपलब्ध न होने के कारण प्रस्ताव अभी लंबित है।