सुल्तानपुर। सुल्तानपुर जिले के कंटेंट क्रिएटर मानवेंद्र सिंह ने सार्वजनिक आयोजनों में अवधी क्रिएटर्स को कथित तौर पर बिना मेहनताना बुलाए जाने का मुद्दा उठाया है। सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में उन्होंने कहा कि अवधी क्रिएटर अपने खर्च पर कार्यक्रमों में पहुंचते हैं और भीड़ जुटाने से लेकर इवेंट को सफल बनाने तक योगदान देते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई जगह उन्हें उचित सम्मान और भुगतान नहीं मिलता। उन्होंने आयोजकों से अवधी क्रिएटरों के काम और उनकी पहचान को गंभीरता से लेने की अपील की।
मुख्य बातें
- मानवेंद्र सिंह ने अवधी क्रिएटरों को बिना मेहनताने बुलाने का मुद्दा उठाया।
- पोस्ट में दूसरे क्षेत्रों के लोगों को भुगतान और अवधी क्रिएटरों के साथ कथित भेदभाव पर सवाल किया।
- अवधी क्रिएटरों के लिए उचित सम्मान और मेहनताने की मांग की।
अपने खर्च पर इवेंट में पहुंचने का लगाया आरोप
मानवेंद्र सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा कि अवधी क्रिएटरों को अक्सर कार्यक्रमों में मुफ्त में बुलाया जाता है। उनके मुताबिक, कई क्रिएटर अपना पैसा खर्च करके आयोजनों में पहुंचते हैं। कुछ जगह उन्हें सम्मान मिलता है, जबकि कुछ आयोजनों में उनका इस्तेमाल केवल फोटो और वीडियो बनवाने के लिए किया जाता है।
भीड़ जुटाने में योगदान के बावजूद भुगतान पर सवाल
मानवेंद्र सिंह ने दावा किया कि आयोजक अवधी क्रिएटरों को भीड़ जुटाने के उद्देश्य से बुलाते हैं, लेकिन उन्हें मेहनताना देने के मामले में भेदभाव किया जाता है। उन्होंने पोस्ट में यह भी कहा कि टीवी और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कुछ लोगों को भुगतान करके बुलाया जाता है, जबकि अवधी क्रिएटरों को वैसा आर्थिक महत्व नहीं दिया जाता। हालांकि, पोस्ट में जिन आयोजनों या लोगों के संदर्भ में यह तुलना की गई है, उनके नाम और भुगतान से जुड़ा कोई विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
‘हम किसी के खिलाफ नहीं, बस उचित सम्मान चाहते हैं’
मानवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी के विरोध में नहीं है। वह चाहते हैं कि अवधी क्रिएटरों के योगदान को पहचान मिले और उनके काम के बदले उचित मेहनताना दिया जाए। उनका कहना है कि अवधी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान और संस्कृति का हिस्सा है। ऐसे में इस भाषा में कंटेंट बनाने वाले लोगों के काम को भी उचित महत्व मिलना चाहिए।

अवधी भाषा और संस्कृति से जुड़ा सम्मान का सवाल
मानवेंद्र सिंह की पोस्ट ने आयोजनों में कंटेंट क्रिएटरों की भूमिका, उनके पारिश्रमिक और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार से जुड़े सवाल सामने रखे हैं। उनकी मांग है कि कार्यक्रमों में अवधी क्रिएटरों को केवल प्रचार या भीड़ जुटाने का माध्यम न माना जाए, बल्कि उनके समय, मेहनत और पहुंच के अनुरूप सम्मान तथा भुगतान भी दिया जाए।