लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर रोजाना पांच से सात घंटे बिताने वाले युवा अगर अपना एक-दो घंटा भी अच्छी किताबों को दें, तो उनके जीवन को नई दिशा मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने रील बनाकर लाइक्स जुटाने के बजाय वास्तविक जीवन में आगे बढ़ने और महापुरुषों की जीवनियां पढ़कर उनसे प्रेरणा लेने पर जोर दिया।
मुख्य बातें
- योगी ने युवाओं से रोजाना एक-दो घंटे पुस्तकें पढ़ने की अपील की।
- पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन हुआ।
- ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय और डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने पर जोर दिया गया।
रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा का हिंदी संस्करण जारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पुस्तक को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।
योगी ने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने अभावों को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प के सहारे उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, उनकी जीवन यात्रा युवाओं को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
ग्राम पंचायतों में बन रहे पुस्तकालय
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों तक पढ़ने की सुविधा पहुंचाने के लिए पुस्तकालय विकसित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं और इनमें एक कक्ष पुस्तकालय के लिए निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों के साथ महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में भी पुस्तकालयों का विस्तार किया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से भी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है। योगी ने पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा को भी अधिक से अधिक पुस्तकालयों तक पहुंचाने की बात कही।
पुस्तक मेलों में युवाओं की भागीदारी का किया जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुस्तक मेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि डिजिटल दौर में लोग पुस्तकें खरीदने में कितनी रुचि दिखाएंगे। हालांकि, लखनऊ के बाद गोरखपुर में आयोजित पुस्तक मेले में भी अच्छी बिक्री हुई।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में लगे पुस्तक मेले में युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि मौजूद है, जरूरत है उन्हें पुस्तकें उपलब्ध कराने और पढ़ने के लिए बेहतर अवसर देने की।
संघर्ष से राष्ट्रपति पद तक पहुंचे रामनाथ कोविन्द
मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविन्द के जीवन के विभिन्न पड़ावों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कानपुर के परौंख गांव में एक गरीब परिवार में जन्मे कोविन्द ने बचपन में अपनी मां को खो दिया था। गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों के पक्ष में काम किया।
इसके बाद उन्होंने भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति जैसे पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। योगी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करना व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रपति बनने के बाद भी गांव से जुड़ाव कायम
मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविन्द के अपने गांव परौंख और पुराने साथियों से संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी कोविन्द का अपनी जन्मभूमि से जुड़ाव बना रहा। गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां के विद्यालय भवन को विकसित कर राज्य सरकार को सौंपा गया, जिसे आवासीय विद्यालय के रूप में आगे बढ़ाया गया।
योगी ने इस प्रसंग के जरिए जन्मभूमि और अपने मूल से जुड़े रहने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसी जीवनियों से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयास करना चाहिए।