प्रतापगढ़: सिपाही Devesh Pandey बने दरोगा, ड्यूटी के साथ की पढ़ाई पाई सफलता

यूपी पुलिस में सिपाही रहते हुए पास की एसआई भर्ती परीक्षा

कहते हैं कि मजबूत इरादों और लगातार मेहनत के दम पर हर मंजिल हासिल की जा सकती है। इस बात को प्रतापगढ़ में तैनात यूपी पुलिस के सिपाही देवेश पांडेय ने सच साबित कर दिखाया है। यूपी पुलिस में आरक्षी के पद पर कार्यरत देवेश पांडेय ने उप निरीक्षक (एसआई) सीधी भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर सिपाही से दरोगा बनने का सपना पूरा कर लिया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गांव और पुलिस विभाग में खुशी का माहौल है।

ड्यूटी के साथ जारी रखी पढ़ाई, नहीं छोड़ा अपना सपना

देवेश पांडेय मूल रूप से मिर्जापुर जिले के पकड़ी का पूरा गांव के रहने वाले हैं। वर्ष 2005 में उनकी भर्ती यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर हुई थी। वर्तमान में वह प्रतापगढ़ जिले के नवाबगंज थाने में 2025 बैच के रिक्रूट आरक्षियों के पैरोकार के रूप में तैनात हैं।

पुलिस की व्यस्त नौकरी के बावजूद देवेश ने अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने ड्यूटी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी और उप निरीक्षक सीधी भर्ती परीक्षा में शामिल हुए। हाल ही में घोषित यूपी पुलिस एसआई भर्ती के अंतिम परिणाम में उनका चयन हो गया।

15 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों में बनाई जगह

यूपी पुलिस में उप निरीक्षक के 4,543 पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में करीब 15 लाख 75 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। लंबी चयन प्रक्रिया के बाद 4,543 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिसमें देवेश पांडेय ने भी अपनी जगह बनाई।

पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने केवल एसआई भर्ती ही नहीं, बल्कि लोको पायलट, सीआईएसएफ और दिल्ली पुलिस जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी की। हर प्रयास ने उन्हें कुछ नया सिखाया और अंततः उनकी मेहनत रंग लाई।

एसपी दीपक भूकर ने किया सम्मानित, बताया प्रेरणास्रोत

देवेश पांडेय की सफलता पर प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने उन्हें अपने कार्यालय बुलाकर सम्मानित किया। एसपी ने मिठाई खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक भी मौजूद रहे।

एसपी दीपक भूकर ने कहा कि देवेश की सफलता कठिन परिश्रम, अनुशासन और निरंतर प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उन्होंने देवेश की उपलब्धि को पुलिस विभाग के अन्य जवानों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

संघर्ष से सफलता तक का सफर बना युवाओं के लिए मिसाल

देवेश पांडेय की कहानी बताती है कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी यदि व्यक्ति सीखने और आगे बढ़ने का जुनून बनाए रखे तो वह नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। सिपाही से दरोगा बनने का उनका सफर केवल पद परिवर्तन नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन, धैर्य और मेहनत की मिसाल है। सीमित संसाधनों और व्यस्त नौकरी के बीच उन्होंने यह साबित कर दिया कि लगातार प्रयास करने वालों की मेहनत एक दिन जरूर रंग लाती है।

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