बस्ती। बस्ती की एक बुजुर्ग महिला की कहानी रिश्तों और इंसानियत दोनों पर सवाल खड़े करती है। जिस बेटे का नाम वह अस्पताल में आखिरी वक्त तक लेती रही, उसके आने का इंतजार करते-करते उसकी मौत हो गई। मौत के बाद भी करीब पांच दिन तक शव मर्चरी में रखा रहा, लेकिन बेटा अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। आखिरकार एक सामाजिक संस्था के प्रमुख ने आगे बढ़कर बेटे का फर्ज निभाया और बुजुर्ग महिला को मुखाग्नि दी।
हर्रैया के आसरा आवास में मिली थी बुजुर्ग महिला
मामला हर्रैया नगर पंचायत के आसरा आवास का है। करीब 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला बेहद खराब हालत में वहां मिली थीं। पड़ोसियों की सूचना के बाद करीब 25 दिन पहले ‘सेवा समर्पण भाव परिवार’ संस्था के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। संस्था के मुताबिक महिला और उनके साथ रह रहे एक वृद्ध पुरुष करीब 20 दिनों से भूख और बीमारी से परेशान थे।
हालात गंभीर देखकर संस्था के लोगों ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की मदद ली। दोनों को पहले हर्रैया सीएचसी ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल बस्ती रेफर कर दिया गया।
अस्पताल में भी बेटे का इंतजार करती रही मां
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान बुजुर्ग महिला की हालत लगातार गंभीर बनी रही। संस्था के सदस्यों के मुताबिक वह बार-बार अपने बेटे दिलीप का नाम लेती थीं। अस्पताल में किसी के आने की आहट होती तो उनकी नजरें दरवाजे की ओर उठ जातीं।
महिला को उम्मीद थी कि उनका बेटा आएगा और उन्हें अपने साथ घर ले जाएगा। लेकिन यह इंतजार पूरा नहीं हो सका। 29 जुलाई को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद संस्था के लोगों ने महिला के परिजनों और बेटे तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन कोई अंतिम संस्कार के लिए सामने नहीं आया। बताया जा रहा है कि महिला का शव करीब पांच दिनों तक मर्चरी में रखा रहा।
बेटे ने नहीं निभाया फर्ज, संस्था प्रमुख ने दी मुखाग्नि
जब लंबे इंतजार के बाद भी कोई परिजन नहीं पहुंचा तो ‘सेवा समर्पण भाव परिवार’ के प्रमुख दिलीप पाण्डेय ने बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने महिला को अपनी मां की तरह मानते हुए बस्ती के पौराणिक मुड़घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दिलीप पाण्डेय ने बुजुर्ग महिला को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान संस्था के सत्यम मिश्रा, राहुल गौतम, उमंग पाण्डेय समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।