लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने के बीच कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने मछुआरा समाज को सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बिना किसी दल का नाम लिए उन नेताओं पर निशाना साधा, जो उनके मुताबिक लंबे समय तक समाज के बीच दिखाई नहीं दिए और अब चुनावी माहौल में पंचायत के बहाने सक्रिय हो रहे हैं। संजय निषाद ने ऐसे लोगों को ‘बरसाती मेंढक’ और ‘दरी बिछाने वाले सौदागर’ बताया। उनके इस पोस्ट की खबर एबीपी लाइव और अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी प्रकाशित हुई है।
मुख्य बातें
- संजय निषाद ने मछुआरा समाज से चुनावी मौसम में सतर्क रहने की अपील की।
- ‘बरसाती मेंढक’ और ‘दरी बिछाने वाले सौदागर’ कहकर राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा।
- फूलन देवी की राजनीतिक विरासत का मुद्दा उठाते हुए भी सियासी हमला बोला।
‘साढ़े चार साल नहीं आए, अब पंचायत के बहाने कूदने लगे’
संजय निषाद ने मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत मछुआरा समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि चुनावी मौसम में ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा, जो लंबे समय तक समाज के सुख-दुख में शामिल नहीं रहे और अब पंचायत के बहाने उसके बीच पहुंचने लगे हैं।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “जो साढ़े चार साल आपके सुख-दुख में नहीं आए- अब दरी बिछाने वाले वही सौदागर पंचायत के बहाने आपके आसपास बरसाती मेंढक की तरह कूदने लगे हैं।” संजय निषाद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूपी में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न दलों की गतिविधियां तेज हो रही हैं।
फूलन देवी की हत्या और राजनीतिक विरासत का मुद्दा
संजय निषाद ने अपने पोस्ट में पूर्व सांसद फूलन देवी का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की अलग राजनीतिक पहचान को उभरने से रोकने का प्रयास किया, उनसे और उनकी मदद करने वालों से समाज को सावधान रहना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने फूलन देवी की हत्या की सुपारी दी, उनकी संपत्ति पर कब्जा किया और उनकी राजनीतिक विरासत को मछुआरा समुदाय से छीनने की कोशिश की, ऐसे लोग समाज का भला नहीं चाह सकते। फूलन देवी की हत्या की जांच को लेकर संजय निषाद पहले भी सवाल उठाते रहे हैं और सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं।
‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं’
संजय निषाद ने मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि “मछुआरों की अब स्वतंत्र पहचान निषाद पार्टी हैं।” साथ ही उन्होंने कहा कि मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं, बल्कि ओबीसी समाज के हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं।
उन्होंने समाज को चुनावी मौसम में सामने आने वाले नए चेहरों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा, “बरसाती मेंढक भेष बदल-बदल के आएंगे। उनसे सावधान रहना है।” मछुआरा समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर यूपी में पहले भी अलग-अलग दलों और नेताओं के बीच सक्रियता देखने को मिली है। फूलन देवी की राजनीतिक विरासत भी इस समुदाय से जुड़े विभिन्न राजनीतिक दावों का हिस्सा रही है।
अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने का संदेश
संजय निषाद के पोस्ट में मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान, अधिकारों और चुनावी भूमिका पर जोर दिया गया है। उन्होंने समाज से अपील की कि चुनावी मौसम में सक्रिय होने वाले नेताओं और संगठनों को उनके पिछले कामकाज के आधार पर परखा जाए और अपने हितों व अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए।