लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में कानून-व्यवस्था, संविधान और न्यायपालिका की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब ‘रूल ऑफ माफिया’ से मुक्त होकर ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून के शासन की ओर बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने और तकनीक के इस्तेमाल में मानवीय विवेक को प्राथमिकता देने की अपील की।
मुख्य बातें
- सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह रहता था।
- युवा अधिवक्ताओं को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और संविधान के मूल्यों की रक्षा करने की सीख दी।
- AI, डीपफेक और साइबर अपराधों के दौर में साक्ष्यों की विश्वसनीयता और मानवीय विवेक को अहम बताया।
‘रूल ऑफ माफिया’ से ‘रूल ऑफ लॉ’ तक का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह की स्थिति रहती थी। उनके मुताबिक, माफिया के कारण विकास की राह बाधित होती थी। सरकार ने कानून का शासन स्थापित करके प्रदेश की छवि बदलने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि संविधान किसी व्यक्ति या पद को उससे ऊपर रहने की अनुमति नहीं देता। युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है।” उन्होंने जोर दिया कि अन्याय सामने होने पर चुप रहना कोई विकल्प नहीं होना चाहिए।
आपातकाल का जिक्र, न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति को किया याद
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 की तरह 25 जून 1975 की तारीख भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने आपातकाल का उल्लेख करते हुए ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ के अंतर को समझाया।
मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उदाहरण देते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया निर्णय इतिहास में अपनी जगह बनाता है। उन्होंने युवा वकीलों से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने और न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़े रहने का आह्वान किया।
‘सत्यं वद, धर्मं चर’ को जीवन में उतारने की सीख
मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं से कहा कि ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ जैसे सिद्धांतों को सिर्फ चैंबर की दीवारों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने सत्य और निरंतर अध्ययन को वकालत की बुनियाद बताया। डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान देने तथा दबाव में अपने सिद्धांतों से समझौता न करने की सलाह दी।
AI को सहायक बनाएं, सारथी नहीं: युवाओं को संदेश
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से ही होना चाहिए। उन्होंने चेताया कि लापरवाही से तैयार किए गए कानूनी मसौदे के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति को अपनी स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है।
मुख्यमंत्री ने डीपफेक और साइबर अपराधों को साक्ष्यों की विश्वसनीयता के सामने नई चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित हैं। ‘एआई प्रज्ञा’ कार्यक्रम के माध्यम से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि 2047 तक इस संकल्प को पूरा करने में युवा अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए तैयार कार्ययोजना का भी जिक्र किया।