मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, 22 गवाहों की गवाही बनी अहम आधार

मेरठ। चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने 14 अक्टूबर को मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। सजा सुनाने से पहले दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। सुनवाई के दौरान जब जज ने मुस्कान से सजा को लेकर उसकी इच्छा पूछी, तो उसने अपनी दो बेटियों की देखभाल किए जाने की बात कही। वहीं, साहिल इस सवाल पर खामोश रहा।

मुख्य बातें
  • अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई।
  • सजा से पहले मुस्कान ने अपनी बेटियों की देखभाल की बात कही, साहिल चुप रहा।
  • अभियोजन पक्ष ने चश्मदीद, हथियारों की बरामदगी, कॉल डिटेल और 22 गवाहों के बयान पेश किए।

जज ने पूछा- क्या सजा चाहती हो? मुस्कान ने बेटियों का किया जिक्र

बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे जज अरविंद कुमार मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जेल में बंद मुस्कान और साहिल का पक्ष सुना। अदालत में जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा कि उसकी बच्चियों का ख्याल रखा जाए। इसके बाद वह खामोश हो गई। यही सवाल साहिल से भी किया गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।

3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या

इस मामले में सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। आरोप के मुताबिक, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस घटना ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।

जुलाई 2025 में जिला अदालत में मामले का ट्रायल शुरू हुआ। इसके बाद 30 सितंबर को अदालत ने मुस्कान और साहिल को सौरभ की हत्या का दोषी ठहराया था। सजा पर बहस के दौरान सरकारी वकील केके चौबे ने दोनों के लिए फांसी की मांग की थी।

बचाव पक्ष ने मांगी थी कम से कम सजा

मुस्कान और साहिल की ओर से पेश वकील रेखा जैन ने अदालत से कम से कम सजा देने की अपील की थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मुस्कान की दो बेटियां हैं और उसके माता-पिता बुजुर्ग हैं। दूसरी ओर, सरकारी पक्ष ने अपराध की गंभीरता और मुकदमे में पेश साक्ष्यों के आधार पर कठोरतम सजा देने की मांग की। अदालत ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।

ये आठ प्रमुख साक्ष्य बने अभियोजन पक्ष का आधार

मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए कई तरह के साक्ष्य और गवाह पेश किए। उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रमुख साक्ष्य इस प्रकार थे:

  1. हत्या वाली रात साहिल को सौरभ के घर जाते देखने वाले चश्मदीद का बयान।
  2. मुस्कान और साहिल की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू और उस्तरे की बरामदगी।
  3. बरामद हथियारों पर मानव रक्त मिलने की जानकारी।
  4. मुस्कान और साहिल की कॉल डिटेल तथा सोशल मीडिया चैट।
  5. सौरभ के दोस्त संजीव पाल की गवाही और उसकी कॉल डिटेल।
  6. सौरभ की मां रेनू की कॉल डिटेल।
  7. उन होटलों के CCTV फुटेज और मैनेजरों के बयान, जहां मुस्कान और साहिल ठहरे थे।
  8. मुकदमे के दौरान 22 गवाहों की गवाही।

इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया और मृत्युदंड सुनाया। मृत्युदंड के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।

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