निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने मछुआरा समुदाय को लेकर सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर बिना नाम लिए बिहार के एक नेता पर तीखा हमला बोला है। पोस्ट में उन्होंने ‘आयातित मौसमी नेताओं’ से समाज को सावधान रहने की अपील की है। राजनीतिक हलकों में इसे विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है, जो पहले भी यूपी में निषाद समाज के बीच राजनीतिक सक्रियता दिखा चुके हैं।
मुख्य बातें
- संजय निषाद ने ‘आयातित मौसमी नेताओं’ से सावधान रहने को कहा।
- पोस्ट में बिहार की मछुआरा राजनीति और यूपी में सक्रियता का जिक्र।
- राजनीतिक तौर पर निशाना VIP प्रमुख मुकेश सहनी की ओर माना जा रहा है।
‘आयातित मौसमी नेताओं’ से सावधान रहने की अपील
संजय निषाद ने लिखा कि आजादी के बाद पहली बार यूपी में मछुआरा समुदाय राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ है। विधानसभा चुनाव का मौसम बन चुका है। ऐसे में आयातित मौसमी नेताओं से समाज को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। मौसमी नेता अब तक तय नहीं कर पाए हैं कि वे मुंबई में व्यापार करेंगे, यहां वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछाएंगे या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली ही करते रहेंगे- जैसे अभी अपने राज्य में किया।
संजय निषाद ने निषाद समाज का वोट बेचने का आरोप लगाया और बिना नाम लिए कहा, “जो बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम रहा हो- बिहार में मछुआरों के राजनीतिक उभार को ग्रहण लगा चुका हो, जो एक विधानसभा चुनाव तक जीतने की हैसियत नहीं रखता हो- वह जेब में नोटों की गड्डी रखके लाल टोपी, नीली वर्दी पहनकर यूपी के निषाद समाज को गुमराह करने की राजनीति करने निकला है।”
उन्होंने लिखा, “मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। यूपी के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह जानना आवश्यक है कि राजनीति उनके खून में है।”
संजय निषाद अपनी पोस्ट में आगे कहा, “मछुआरा गरीब भले ही हैं लेकिन गद्दार पुत्र नहीं है अंग्रेजों मुगलों से लड़ने वाला है उन्हें मौत का घाट उतारने वाला, देश को आजाद करने वाला, संविधान लिखवाने वाला है और संविधान में आरक्षण भी लिखवाने वाला है कुछ नासमझ लोगों की वजह से आरक्षण लुट गया और लूट रहा है। समाज को एक नहीं होने दे रहे हैं। यह केवट, मल्लाह, बिंद, कश्यप में भेद कर रहे है। जो भी दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज में पैसा देगा, बिकाऊ पिआऊ का लेबल लगा रहा है, सही मायने में गद्दार पुत्र है।”
इशारा मुकेश सहनी की तरफ क्यों माना जा रहा है?
संजय निषाद की पोस्ट में बिहार के मछुआरा समुदाय की राजनीति का विशेष उल्लेख है। इसी वजह से राजनीतिक चर्चा में VIP प्रमुख मुकेश सहनी का नाम सामने आ रहा है। सहनी बिहार की राजनीति में मल्लाह-निषाद समुदाय के प्रमुख नेताओं में रहे हैं और पहले यूपी में भी निषाद आरक्षण और समाज को राजनीतिक रूप से एकजुट करने के मुद्दे पर सक्रिय रहे हैं।
2021 में सहनी ने यूपी के कई इलाकों का दौरा किया था और मछुआरा समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक जमीन बनाने की कोशिश की थी। उस समय उनकी VIP और संजय निषाद की निषाद पार्टी के बीच मछुआरा वोटों को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी चर्चा में रही थी।