लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों की शुरुआती शिक्षा को ज्यादा सहज और गतिविधि आधारित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। प्रदेश के 1,235 पीएम श्री विद्यालयों में संचालित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं के लिए ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध कराने पर 61.75 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इनका इस्तेमाल कहानी, कविता, गीत और पहेलियों जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने में किया जाएगा।
मुख्य बातें
- 1,235 पीएम श्री विद्यालयों के लिए कुल 61.75 लाख रुपये स्वीकृत।
- प्रत्येक विद्यालय में 5,000 रुपये तक का ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध होगा।
- हर शनिवार बच्चों के साथ कहानी, गीत, कविता और पहेली जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी।
खेल और कहानी के जरिए मजबूत होगी बच्चों की नींव
प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चों की भाषा, सुनने की क्षमता और अभिव्यक्ति विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से ब्लूटूथ स्पीकर के माध्यम से कहानी, कविता, गीत और पहेलियों जैसी गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की योजना है।
इन गतिविधियों से बच्चों को केवल सुनने और बोलने का अवसर ही नहीं मिलेगा, बल्कि वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और आसपास के वातावरण को समझने की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे।
1,235 विद्यालयों को 5 हजार रुपये तक की सुविधा
सरकार की ओर से प्रदेश के 1,235 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं के लिए एक-एक ब्लूटूथ स्पीकर खरीदने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक विद्यालय के लिए अधिकतम 5,000 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इस तरह इस योजना के लिए कुल 61.75 लाख रुपये की धनराशि एसएनए स्पर्श (SNA-SPARSH) के तहत जारी की गई है।
स्पीकर में जरूरी तकनीकी सुविधाएं भी होंगी
ब्लूटूथ स्पीकर के लिए तकनीकी मानक भी तय किए गए हैं। इसमें कम से कम 30 वाट पावर, ब्लूटूथ 5.3 या उससे ज्यादा, कम से कम 10 मीटर की कनेक्टिविटी रेंज और डुअल 5.2 या उससे ऊपर के ड्राइवर होने चाहिए। इसके अलावा रिचार्जेबल बैटरी, कम से कम तीन घंटे का बैटरी बैकअप, 2,000 mAh या उससे अधिक क्षमता, टाइप-C चार्जिंग पोर्ट और चार घंटे या उससे कम समय में चार्जिंग की सुविधा रखी गई है। माइक्रोफोन इनपुट, वॉल्यूम और प्लेबैक कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी निर्धारित की गई हैं।
हर शनिवार बच्चों के लिए होगा विशेष इस्तेमाल
शासन के निर्देश के अनुसार इन स्पीकरों का इस्तेमाल प्रत्येक शनिवार को 3 से 6 वर्ष के बच्चों के साथ गतिविधियों में किया जाएगा। मॉडल शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकत्री और ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर कहानी, कविता, गीत और पहेलियों के जरिए बच्चों को सीखने से जोड़ेंगे।
इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य शुरुआती शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे खेल, संवाद और गतिविधियों के माध्यम से ज्यादा प्रभावी बनाना है। साथ ही, ब्लूटूथ स्पीकर की गुणवत्ता और उसके नियमित उपयोग की निगरानी के भी निर्देश दिए गए हैं।