उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराने को कहा है। साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम करते रहने की बात कही है। इस मामले में 11 याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें छह जनहित याचिकाएं भी शामिल हैं।
मुख्य बातें
- हाईकोर्ट ने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया।
- निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे।
- ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट तैयार करने के तरीके पर कोर्ट ने असंतोष जताया था।
11 याचिकाओं पर एक साथ हुई सुनवाई
ग्राम पंचायत चुनाव से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 11 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। पीठ में जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद शामिल थे। याचिकाओं में समय पर चुनाव कराने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
योगी सरकार के फैसले को दी गई चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार के 25 मई के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। मामले में यूपी सरकार, निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को पक्षकार बनाया गया।
ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर असंतोष जताया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि रिपोर्ट फील्ड में जाकर तैयार करने के बजाय दफ्तर में बैठकर बनाई गई प्रतीत होती है। पंचायत चुनाव से जुड़ी सभी याचिकाओं को संबद्ध कर एक साथ सुना गया।