लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान के बाद जयंत चौधरी ने भी पलटवार किया था। अब रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने अखिलेश यादव और सपा के अंदरूनी हालात को लेकर कई दावे किए हैं।
मुख्य बातें
- रोहित अग्रवाल ने शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव को लेकर बड़ा दावा किया।
- कहा- सपा कार्यालय आने के लिए अखिलेश यादव की अनुमति लेनी होगी।
- 2017 और लोहिया ट्रस्ट से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया।
सपा कार्यालय को लेकर रोहित अग्रवाल का दावा
रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने एक वीडियो बयान में दावा किया कि शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव अब अखिलेश यादव की अनुमति के बिना समाजवादी पार्टी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को कार्यालय आने के लिए सपा अध्यक्ष से अनुमति लेनी होगी। हालांकि, यह रालोद प्रवक्ता का दावा है। उपलब्ध रिपोर्ट में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि या सपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
शिवपाल यादव को लेकर 2017 का जिक्र
रोहित अग्रवाल ने अपने बयान में 2017 के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय शिवपाल यादव से सपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद लिया गया और बाद में लोहिया ट्रस्ट से जुड़े घटनाक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। रालोद प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि पार्टी कार्यालय में प्रवेश के लिए भी अनुमति की स्थिति को किस तरह समाजवाद की राजनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।
‘परिवार नहीं संभाल सकते तो प्रदेश कैसे संभालेंगे?’
रोहित अग्रवाल ने अखिलेश यादव के परिवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने परिवार को नहीं संभाल सकता, वह प्रदेश कैसे संभालेगा। उन्होंने अखिलेश यादव पर पार्टी की शक्तियों को अपने तक सीमित करने का आरोप लगाते हुए इसे समाजवादी पार्टी की विचारधारा के विपरीत बताया। ये सभी टिप्पणियां रोहित अग्रवाल के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर सपा की ओर से प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।
‘चवन्नी से रुपया’ बयान से शुरू हुआ विवाद
सपा और रालोद के बीच मौजूदा बयानबाजी की एक प्रमुख कड़ी अखिलेश यादव का अगस्त में दिया गया बयान है। अखिलेश ने बिना नाम लिए कहा था कि उनकी पार्टी ने कुछ राजनीतिक साथियों को ‘चवन्नी से रुपया’ बनाया, लेकिन वे बाद में साथ छोड़कर चले गए। इस बयान को जयंत चौधरी से जोड़कर देखा गया। इसके जवाब में जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा था कि राजनीति में जनता ही नेताओं को बनाती है। बाद में उन्होंने ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर जाट समाज को निशाना बनाए जाने का भी आरोप लगाया।