प्रतापगढ़: पट्टी कोतवाली में 22 वर्षीय अर्जुन की मौत के बाद एक्शन, कोतवाल और SI निलंबित

प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ के पट्टी कोतवाली परिसर में 22 वर्षीय अर्जुन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने कार्रवाई की है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर पट्टी प्रभारी आनंद पाल सिंह और उपनिरीक्षक ओंकार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच की संस्तुति भी की है। वहीं, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार भाटी ने बताया है कि युवक ने कोतवाली परिसर के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। दूसरी ओर, मृतक के परिजनों ने हिरासत में हत्या की आशंका जताई है।

मुख्य बातें
  • पट्टी कोतवाली में 22 वर्षीय अर्जुन की मौत के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई।
  • थाना प्रभारी आनंद पाल सिंह और उपनिरीक्षक ओंकार सिंह निलंबित।
  • मजिस्ट्रियल जांच की संस्तुति, मौत के कारणों की जांच जारी।

शौचालय में फांसी लगाने की पुलिस की बात

अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार भाटी ने बताया कि अर्जुन ने पट्टी कोतवाली परिसर स्थित शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या की। हालांकि, मौत की परिस्थितियों और पूरे घटनाक्रम की जांच अभी जारी है।

परिजनों ने हिरासत में हत्या की जताई आशंका

वहीं मृतक के पिता लल्लू ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि कुछ समय पहले पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और बेटे की मौत की सूचना दी। इसके बाद उन्होंने आशंका जताई कि अर्जुन की पुलिस हिरासत में हत्या की गई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

एसपी दीपक भूकर का एक्शन, दो पुलिसकर्मी निलंबित

मामले में पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने तत्काल कार्रवाई की है। प्रतापगढ़ पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर पट्टी थाना प्रभारी आनंद पाल सिंह और उपनिरीक्षक ओंकार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि पूरे मामले में मजिस्ट्रियल जांच की संस्तुति की गई है। इस जांच के जरिए युवक की मौत की परिस्थितियों, पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

पोस्टमार्टम और CCTV फुटेज से सामने आएगी पूरी तस्वीर

मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा घटनास्थल की जांच, फोरेंसिक साक्ष्य, CCTV फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के बयान भी जांच का हिस्सा होंगे। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 196 के तहत पुलिस हिरासत में मृत्यु होने की स्थिति में मजिस्ट्रेट द्वारा मृत्यु के कारणों की जांच का प्रावधान है। ऐसे में मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट भी मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल

अगर पुलिस के अनुसार अर्जुन ने कोतवाली परिसर के शौचालय में फांसी लगाई, तो जांच में यह भी देखा जाएगा कि वह वहां किन परिस्थितियों में पहुंचा और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किस पुलिसकर्मी की थी। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

फिलहाल मामले में पुलिस का कहना है कि अर्जुन ने शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या की, जबकि परिवार ने हिरासत में हत्या की आशंका जताई है। थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक के निलंबन तथा मजिस्ट्रियल जांच की संस्तुति के बाद अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष पर सबकी नजर है।

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