लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर चर्चा तेज है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 27 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया। वहीं, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए उन्होंने पतंग और डोर का उदाहरण दिया। अखिलेश ने चुनावी मुकाबले को 90-10 का खेल भी बताया।
मुख्य बातें
- अखिलेश यादव ने चंद्रशेखर आजाद से गठबंधन की संभावना नकारी।
- ओवैसी पर पतंग और डोर का उदाहरण देकर निशाना साधा।
- अखिलेश ने कहा, इस बार मुकाबला 80-20 नहीं, 90-10 का है।
चंद्रशेखर आजाद के साथ गठबंधन पर क्या बोले अखिलेश?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के साथ गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर सपा प्रमुख ने गठबंधन की संभावना से इनकार करते हुए कहा, “चंद्रशेखर आजाद से क्यों गठबंधन हो जाएगा? उनके बिना भी हम जीत रहे हैं।” अखिलेश के इस बयान से दोनों दलों के बीच संभावित चुनावी गठबंधन को लेकर जारी चर्चाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ओवैसी पर पतंग और डोर का उदाहरण देकर निशाना
अखिलेश यादव ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “डोर किसके हाथ में है? पतंग उतनी ही ऊपर जाती है, जितनी ढील दी जाती है। डोर खत्म तो खेल खत्म।” उन्होंने आगे कहा कि पीछे से जितनी ढील दी जाएगी, पतंग उतनी ही ऊपर जाएगी। अखिलेश के इस बयान को ओवैसी पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
80-20 नहीं, 90-10 के मुकाबले की बात
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि इस बार चुनावी मुकाबला 80-20 का नहीं, बल्कि 90-10 का है। उन्होंने कहा, “जो पीड़ित हैं, वो 90 हैं।” उनके इस बयान के जरिए चुनावी राजनीति में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का मुद्दा भी सामने आया है।
ओवैसी पहले भी अखिलेश पर लगा चुके हैं आरोप
इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। ओवैसी का आरोप था कि मुस्लिमों के अधिकारों की बात करने वालों को अखिलेश अपना विरोधी समझते हैं।
ओवैसी ने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए तत्कालीन सपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उस समय सपा के पास 47 मुस्लिम विधायक होने के बावजूद मुस्लिम समुदाय के हितों की अनदेखी की गई। ओवैसी ने यह भी कहा था कि जब वह मुस्लिमों के अधिकारों की बात करते हैं, तो अखिलेश उन्हें भाजपा का एजेंट बताते हैं। ये आरोप ओवैसी की ओर से लगाए गए थे।